हमारी राष्ट्रीय प्रतिज्ञा के लेखक थे कवि ‘पेदेमरी व्यंकट सुब्बाराव’
हम सभी स्कूली जीवन से ही पाठ्यपुस्तक की शुरुआत में राष्ट्रीय प्रतिज्ञा कहते आ रहे हैं। भारत मेरा देश है। सभी भारतीय मेरे भाई हैं। मुझे अपने देश से प्यार है। यह प्रतिज्ञा हमारी पहचान और एकता का एक अभिन्न अंग है। हम राष्ट्रगान ‘वंदे मातरम्’ के लेखक और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के लेखक रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिमचंद्र चटर्जी के नामों से परिचित हैं। पाठ्यपुस्तकों में भी इन्हीं नामों का उल्लेख है, लेकिन हममें से अधिकांश को इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि हमारी राष्ट्रीय प्रतिज्ञा किसने लिखी और कब इसे पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया गया?
हमारी राष्ट्रीय प्रतिज्ञा से तर्कसंगत, समतावादी, एकीकृत समाज के निर्माण का आदर्श विचार रखा गया है। हम आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनमोल धरोहर को संरक्षित करना जारी रखेंगे। आओ जानते हैं इस प्रतिज्ञा लेखक के बारे में... यह प्रतिज्ञा 1962 में आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तेलुगु लेखक पेदेमरी व्यंकट सुब्बाराव द्वारा तेलुगु में लिखी गई थी। वे आंध्र प्रदेश के नालगोंडा जिले के अन्नपथी गाँव के निवासी थे। उन्होंने संस्कृत, अंग्रेजी और अरबी में स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षा प्राप्त की थी। वह विशाखापट्टनम् में जिला कोषालय अधिकारी के रूप में कई वर्षों तक सरकारी कर्मचारी थे। उनके कुछ उपन्यास, कहानियों का संग्रह, कविताएँ भी लोकप्रिय थीं। मूल रूप से देशभक्ति से प्रेरित, स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले कवि पेदेमरी व्यंकट सुब्बाराव ने 1962 में अपने जिले के स्कूलों में छात्रों के लिए एक प्रतिज्ञा लिखी थी। उनके शिक्षा विभाग के एक मित्र को यह विचार पसंद आया। उन्होंने आंध्र प्रदेश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री पी. वी. जी. राजू को यह प्रतिज्ञा भेजी थी। देश का शिक्षा विभाग केंद्र सरकार के नेतृत्व में जनशक्ति विकास मंत्रालय के तहत काम कर रहा है। इस विभाग की ओर से शिक्षा में निरंतर सुधार का सुझाव दिया जाता है। इसके लिए भारत में शिक्षा के विकास नामक एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री करते हैं। शिक्षा भारत के विकास की 31 वीं बैठक 11 और 12 अक्टूबर 1964 को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में बैंगलोर में आयोजित की गई थी। इस बैठक की रिपोर्ट में भारत में शिक्षा के विकास के पुस्तक विकास के पृष्ठ 140 पर संख्या 18 का उल्लेख किया गया है। स्वतंत्रता से पहले और बाद में शैक्षणिक दस्तावेजों का ऐतिहासिक सर्वेक्षण इसके लिए भारत को मेरा देश मानने की सलाह देने का निर्णय लिया गया था, सभी भारतीय मेरे भाई-बहन हैं... देश के स्तर पर पेदेमरी व्यंकट सुब्बाराव ने लिखा है। आगे सुझाव दिया गया कि इस प्रतिज्ञा को 26 जनवरी 1965 से राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। प्रतिज्ञा का देश स्तर पर विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया गया था और 1965 से देश के सभी राज्यों की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया गया। इस प्रतिज्ञा को न केवल पाठ्यपुस्तक प्रतिज्ञा का दर्जा दिया गया था बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक राष्ट्रीय प्रतिज्ञा का दर्जा भी दिया गया। यह प्रतिज्ञा पहली बार 1965 में पेदेमरी व्यंकट सुब्बाराव ने तेलुगु में लिखी थी। 26 जनवरी 2012 को जब इस प्रतिज्ञा का स्वर्ण जयंती वर्ष सुब्बाराव के दोस्तों और परिवार द्वारा मनाया गया था तब एक छोटी सी कहानी राष्ट्रीय समाचारपत्रों ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और ‘दैनिक हिंदू’ में प्रकाशित हुई थी।
लेखिका : प्रा. विद्या संतोष होडे
(एम.ए.एम. एड.डीएसएम, बीजे-प्रिंट मीडिया)
(एम.ए.एम. एड.डीएसएम, बीजे-प्रिंट मीडिया)
प्रकाशित: हडपसर एक्सप्रेस दिनांक ११/१०/२०२०

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